(डॉ ज़फर सैफ़ी/सम्पादक) 02,09,2025
रामनगर। बात उन दिनो की है जब मे वर्ष 1993 मे राजकीय इंटर काॅलेज, रामनगर मे हाईस्कूल का छात्र था तथा उन दिनो क्लास मे सप्ताह मे एक बार क्लास की गतिविधियो को लेकर दो पन्नो का एक रिर्पोट कार्ड बनाकर सबको पढ़ाने का शोकीन था। पिता जी को शायरी का शोक था सो मुझे भी शायरी का चस्का लग गया ओर उन दिनो सांध्य दैनिक दशानन मे सम्पादक अनिरूद्व निझावन जी के द्वारा रविवार को महफिल नामक एक शीर्षक से शेर-शायरी प्रकाशित की जाती थी तथा इसे समाचार पत्र के डैक्स प्रभारी रामप्रसाद उदास जी देखते थे। उन्ही दिनो हर सप्ताह सर्वश्रेष्ठ शायरी पर एक पुरूस्कार भी शुरू कर दिया गया था। मैने शोकिया जफर सैफी अश्क से शायरी लिखने की शुरूआत कर दी तथा मेरी शायरी काफी पंसद की जाने लगी। 15 पैसे के पोस्टकार्ड मे शायरी लिखकर मे काशीपुर दैनिक दशानन के पंत पार्क वाले एड्रस पर भेजने लगा। इस बीच एक सप्ताह मेरी शायरी भी सर्वश्रैष्ठ घोषित हुयी ओर मे अपनी पुरूस्कार यानि शील्ड रूपी स्मृति चिन्ह लेने के लिये प्रैस पर पहुॅचा तो वहाॅ अंकल जी मुलाकात हुयी ओर मे उनसे काफी प्रभावित हुआ। अंकल जी ने मुझे उस समय रामनगर से दैनिक दशानन के लिये पत्रकारिता कर रहे स्व. घनश्याम सती जी के साथ जुड़कर रिर्पोटिंग करने का सुझाव दिया जो कि मुझे पंसद आया क्योकि मे बचपन से ही अपनी अलग पहचान बनाने के लिये प्रयासरत था ओर पत्रकारिता मुझे इसके लिये सबसे बढ़िया माध्यम लगा। उस समय मे अपने पिता जी के साथ उनकी गाॅधी गली स्थित काॅस्मेटिक की दुकान मे भी सहयोग करता था तथा स्कूल व दुकान के बीच मे बचे समय मे में सती जी के साथ विभागो मे जाता था तो अधिकारी मुझे देखकर हसंते थे तथा तत्कालीन नैनीताल एसएसपी एमए गणपति जी व तत्कालीन थानाध्यक्ष विजय कुमार तंमचा ने मुझे बच्चा पत्रकार का खिताब दे दिया। खैर समय बीतता गया ओर मे पढ़ाई के सिलसिले मे काशीपुर, मुरादबाद, चंदोसी, लखनऊ रहा मगर मेरी शायरी व खबरे व लेख लिखने का शोक बरकार व जिंदा रहा ओर मे दैनिक दशानन से जुड़ा रहा ओर आज तक जुड़ा हुआ ही हूॅ। इस बीच मे पत्रकारिता के कई गुण, समाचार लेखन यह सब मेने अंकल जी व स्व. घनश्याम सती जी से सीखे मे जीवन भर इनका आभारी रहूूॅगा। सच कहूॅ तो मुझे एक ईमानदार व कामयाब पत्रकार बनाने मे दैनिक दशानन व अंकल जी का बहुत बड़ा रोल रहा है तथा इसीलिये मैने अपने पिता जी के बाद हमेशा मेने अंकल जी को अपना मार्गदर्शक भी माना है। इस समाचार पत्र ने मुझे रामप्रसाद उदास, स्व. ओमपाल सिंह चैहान, उमेश कश्यप, महेन्द्र राही, स्व. सतीश परासर, संजय भल्ला, गजेन्द्र यादव, मुकीम अहमद जैसे कई साथियो से मिलाया है। आज अंकल जी अस्वस्थ है व उनके दोनो बेटे अपने-2 निजी कारोबार व कारणो से समाचार पत्र का प्रकाशन करने मे असमर्थ है इसलिये दैनिक दशानन का प्रकाशन कुछ समय के लिये बंद करने की कगार पर है तो मे व मेरी पत्नी अंदर से बहुत दुखी है। मेरी वाईफ का तो यहाॅ तक मानना है कि इतना पुराना समाचार पत्र है आप कुछ लोग रखकर इसे चलाते रहे मगर समय का अभाव व प्रकाशन का खर्चा दोनो ही मेरे आगे आड़े आ रहे है। फिर भी मे ईश्वर से दुआ करता हॅू कि अंकल जी जल्द से जल्द स्वस्थ हो जाये व किसी न किसी तरह दैनिक दशानन का प्रकाशन चलता रहे।








