रामनगर। किसान संघर्ष समिति द्वारा कानिया रामनगर में अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए पचास प्रतिशत आयात शुल्क (टैरिफ) के भारत पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर अमेरिका और अन्य साम्राज्यवादी देशों से किये गये सभी गैर बराबरी पूर्ण समझौते रद्द करने के मामले को लेकर संगोष्ठी का आयोजन किया।संगोष्ठी को संबोधित करते हुए समाजवादी लोक मंच के संयोजक मुनीष कुमार ने कहा कि विगत अप्रैल में अमेरिका ने भारत पर डेयरी व कृषि उत्पादों से आयात शुल्क हटाने का दबाव बनाते हुए 7 अगस्त से 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। जिसके बाद नीति आयोग ने नवीन अमेरिकी व्यापार व्यवस्था के तहत भारत-अमेरिका कृषि व्यापार को बढ़ावा देना शीर्षक से वर्किंग पेपर नं 5 जारी किया था।
इस वर्किंग पेपर में अमेरिका के डेयरी, पाल्ट्री उत्पादों समेत सोयाबीन, मक्का व चावल आदि कृषि उत्पादों के लिए भारत के दरवाजे खोलने की बात कही गई थी। ग्लोबल प्रतियोगिता के लिए कृषि क्षेत्र में ढांचागत बदलाव की सिफारिश करते हुए कहा गया कि निर्यात को और अधिक बढ़ावा देने के लिए भारत के बाजार अमेरिका के लिए खोलने होंगे। मंडी कानूनों में बदलाव, किसानो से सीधी खरीद व किसानों को सुरक्षा के नाम पर प्राइस हेजिंग स्कीम के नाम पर उन्हें सट्टा बाजार में धकेलने की सिफारिश भी की गई थी।अमेरिकी आकाओं को खुश करने के लिए पेपर में भारत को जेनेटिकली मोडिफाइड सोयाबीन का आयात करके बंदरगाह पर ही सोयाबीन का तेल निकालकर अपनी जरूरतों को पूरा करने की वकालत की गई थी। कहा गया कि भारत अमेरिका से सस्ती मक्का का आयात कर, इससे एथोनोल बना कर अपनी बायोफ्यूल की मांग पूरी कर सकता है। इनके उप उत्पादों को विदेशी बाजारों में निर्यात कर जेनेटिकली मोडिफाइड मक्का व सोयाबीन से होने वाले नुकसानों से बचने का तरीका की बात भी पेपर में की गई है।वर्किंग पेपर पर देश के किसान संगठनों द्वारा अमेरिका के साथ इस संभावित कृषि समझौते का विरोध होने पर सरकार ने इस पेपर को वेबसाइट से हटा लिया और कहना शुरू कर दिया कि भारत सरकार देश के किसानों के हितों के खिलाफ अमेरिका से कोई समझौता नहीं करेगी। लेकिन भाजपा सरकार द्वारा दो दिन पहले ही अमेरिका से आने वाली कपास पर लगने वाले टैरिफ को 11 प्रतिशत से घटाकर शून्य करने से स्पष्ट है कि भारत अमेरिका के लिए आने वाले समय में कृषि व डेयरी उत्पाद के लिए बाजार खोलने के लिए तैयार है। और इसके लिए देश में माहौल तैयार किया जा रहा है।मुनीष कुमार ने कहा कि भारत 140 करोड़ लोगों का देश है और यहां पर उत्पादन जनता की जरूरतों को पूरा करने के लिए नहीं बल्कि निर्यात के लिए किया जा रहा है। हमारे देश के लोगों के पास कपड़े, जूते, दवाई और पेट भर भोजन नहीं है लेकिन सरकार देश के कार्पोरेट जगत की तिजोरियों को भरने के लिए आवश्यक सामग्री का निर्यात कर रही है। देश में 300 घराने 7400 करोड़ रुपए प्रतिदिन मुनाफा कमा रहे हैं और देश में 85 करोड़ से भी अधिक आबादी सरकार के 5 किलो राशन पर जीने को मजबूर है। पिछले 3 वर्ष में देश में तेल उत्पादक कंपनियों ने रुस से सस्ते तेल का आयात कर 1.40 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त लाभ कमाया। जिसका 34% लगभग 50 हजार करोड़ रुपए अकेले रिलायंस ने अपनी जेब में रख लिया। सस्ते तेल का जनता को कोई लाभ नहीं मिला है।ललित उप्रेती ने कहा कि देश के किसान किसी भी कीमत पर अमेरिका से कृषि समझौता स्वीकार नहीं करेंगे और सरकार ने जबरन या बैक डोर से अमेरिकी कृषि व डेयरी उत्पादों को भारत में आने की छूट दी तो देश के किसान व आम जनता इसके खिलाफ संघर्ष करने के लिए तैयार है।महिला एकता मंच की ललिता रावत ने कहा कि उत्पादन देश की जनता की जरूरतों को पूरा करने के लिए होना चाहिए। लेकिन आज भाजपा नेतृत्व वाला गठबंधन एनडीए, कांग्रेस, इंडिया गठबंधन व उसकी सरकारों द्वारा अपनाई गई नीतियों के कारण देश आज बर्बादी की तरफ धकेल दिया गया है। जिससे देश को बचाने के लिए आम जनता को आगे आने की जरूरत है।इस अवसर रमेश जोशी, उपपा नेता आसिफ अली, गिरीश चंद्र,आनंद नेगी, ललित मोहन पांडे, प्रेम आर्य, किशन शर्मा, नन्द किशोर, उमाकांत ध्यानी, महेश जोशी, माया नेगी, रेखा जोशी, किरन आर्य, भगवती आर्य, देवी आर्य, रजनी समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।








