रामनगर 9 अगस्त 2026/
शिक्षा एवं प्रशासनिक सेवा , समाज सेवा तथा रामलीला आयोजन के क्षेत्र में लगभग 6 दशकों से अधिक समय तक सक्रिय रहे। श्री योगेश्वर प्रसाद देवरानी को प्रतिष्ठित रामायणी सम्मान के लिए चयनित किया गया है। यह सम्मान उन्हें 19 अगस्त 2026 को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ,वाराणसी उत्तर प्रदेश में आयोजित समारोह में रामायण रिसर्च काउंसिल द्वारा प्रदान किया जाएगा। इस वर्ष देश के विभिन्न श्रेणियों में चयनित विशिष्ट विभूतियों में श्री देवरानी का नाम भी सम्मिलित है।
श्री देवरानी ने अपनी शैक्षिक एवं प्रशासनिक सेवा की शुरुआत वर्ष 1962 से 1979 तक राजकीय हाई स्कूल नैनीसैन ,जनपद चमोली में प्रधानाध्यापक के पद से की । इसके उपरांत वे राजकीय हाई स्कूल सिमली ,चमोली तथा राजकीय इंटर कॉलेज करणप्रयाग चमोली में प्रधानाचार्य रहे ।वर्ष 1979 से 19 89 तक उन्होंने जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी के पद पर जनपद पौड़ी एवं चमोली गढ़वाल में सेवाएं दी। 1989 से 1991 तक जिला विद्यालय निरीक्षक जनपद जालौन उत्तर प्रदेश के पद पर कार्यरत रहे । 1991 से 1993 तक उप शिक्षा निदेशक के पद पर, शिक्षा निदेशालय ,उत्तर प्रदेश, इलाहाबाद में अपनी सेवाएं प्रदान की । तदोपरांत 30 सितंबर 1993 को उप शिक्षा निदेशक पद से सेवानिवृत हुए ।
शैक्षणिक सेवा के साथ ही साथ श्री देवरानी सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सतत सक्रिय रहे । वे 1964 से 1970 तक मंडलीय सचिव, भारत स्काउट एवं गाइड गढ़वाल मंडल, पौड़ी एवं 1993 एवं 94 तक जिला कमिश्नर भारत स्काउट एंड गाइड ,उत्तर प्रदेश, इलाहाबाद तथा 1998 से 2001 तक स्टेट चीफ कमिश्नर हिंदुस्तान स्काउट एंड गाइड, उत्तरांचल रहे। वर्ष 1982-1983 में इनके जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी रहते हुए पौड़ी जनपद में उत्तर प्रदेश में प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम में प्रथम स्थान प्राप्त किया। 1980 से 1988 तक पौड़ी गढ़वाल के रामलीला समिति के अध्यक्ष रहते हुए रामलीला का सफल संचालन किया । साथ ही इन्होंने ग्राम -डिमर, सिमली, करणप्रयाग, जनपद -चमोली में रामलीलाओं के आयोजन में सक्रिय भागीदारी निभाई। श्रीनगर वैकुंठ चतुर्दशी मेला,ज्वालपा देवी नवरात्रि मेला, सल्ड महादेव मकर संक्रांति मेला पौड़ी गढ़वाल ,गौचर मेला चमोली, आदि के प्रमुख मेला संयोजक रहे, एवं पौड़ी ,गोपेश्वर ,जोशीमठ में शरदोत्सव के संयोजक रहे। वे पर्वतीय सभा रामनगर के संरक्षक रहे, एवं आजीवन सदस्य हैं । साहित्यिक क्षेत्र में उनकी 13 पुस्तके प्रकाशित हो चुकी हैं ।
बता दें कि रामायणी सम्मान प्रदान करने वाली संस्था, रामायण रिसर्च काउंसिल के अयोध्या में प्रभु श्री राम लला के मंदिर संघर्ष पर आधारित 1250 पृष्ठों का एक ग्रंथ श्री ” राम लला मन से मंदिर तक” को वर्ष 2018 से लेकर अपने 6 वर्षों के अथक प्रयासों से हिंदी भाषा में तैयार किया है ,तो वही अंग्रेजी भाषा में इसे रूपांतरित किया जा रहा है, इसके बाद कई अन्य अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में इसे तैयार करवा कर विश्व के लोकप्रिय पुस्तकालयो में रखवाया जाना है







